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Hindi MADHUSHALA
Hindi MADHUSHALA
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हरिवंश राय बच्चन की कालजयी कविता, जो जीवन को मधु, साक़ी और प्याले के रूपकों में ढालती है।
हर रूबाई का अंत एक ही शब्द से होता है — मधुशाला। लेकिन यह पुस्तक शराब की नहीं, जीवन की जटिलताओं, द्वंद्वों और भावनाओं की है। हाला (मदिरा), प्याला, मधुशाला — ये सब प्रतीक हैं, जो इंसान की आंतरिक यात्रा, संघर्ष और आत्मान्वेषण को दर्शाते हैं।
1935 में जब यह पुस्तक पहली बार प्रकाशित हुई, तब इसे लेकर विवाद भी हुआ और प्रशंसा भी। पर समय के साथ यह स्पष्ट हो गया कि मधुशाला एक साधारण कविता-संग्रह नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य की सबसे गूढ़ और प्रभावशाली कृतियों में से एक है।
यह पुस्तक वर्षों से न केवल पढ़ी जाती रही है, बल्कि मंचों पर गाई गई है, नाट्य प्रस्तुतियों का हिस्सा बनी है, और मन्ना डे से लेकर अमिताभ बच्चन तक ने इसे बार-बार जीवंत किया है।
अब प्रस्तुत है इसका विशेष संस्करण, जो मधुशाला की 90वीं वर्षगांठ का उत्सव है — एक ऐसा क्लासिक जो हर बार पढ़ने पर नया अर्थ देता है।
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